आइए, सेवाभाव से कुछ काम करते हैं!



सेवा सबसे बड़ा गुण है जो आपको श्रेष्ठतम स्तर पर ले जाता है। सेवा के समान कोई तप और यज्ञ नहीं है। सनातन धर्म और भारतीय चिंतन में सेवा जीवन का एक विशिष्ट अंग रहा है। कुछ लांेगों ने तो सेवा को सबसे बड़ा धर्म माना है। इसी कारण पुरातन काल से ही लगभग सभी देवालयों, मंदिरों के माध्यम से विभिन्न जरूरतमंद वर्गाें को सेवा देकर ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का विधान रहा है। सेवा जितना निस्वार्थ होगा, उसका प्रतिफल उतना ही व्यापक और विशिष्ट होगा। अगर आप सेवाभावी हैं तो और कुछ आपको मिले न मिले, आपको मानसिक संतोष सदा मिलेगा। इसलिए आइए, इसी भाव से हम सब मिलकर समाज के लिए सेवाभाव से कुछ काम करते हैं।



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